{"product_id":"ishq-hai-asman","title":"इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना (Ishq Hai Aasman Mein Ud Ke Jana)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan data-sheets-root=\"1\"\u003eक्या है इश्क? आसमाँ में उड़ के जाना माने क्या? संत रूमी किस इश्क की बात कर रहे हैं? \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eजो रूमी विश्व भर में इश्क पर अपने कलामों के लिए आज भी इतने प्रसिद्ध हैं, एक समय पर वे एक बेहद सम्मानित विद्वान, न्यायविद और मौलवी थे, जो अपने परिवार के साथ एक गंभीर, प्रतिष्ठित और मर्यादित जीवन व्यतीत कर रहे थे। फक्कड़ और मस्तमौला फ़कीर शम्स से रूमी की मुलाकात ने उनकी पूरी चलती हुई व्यवस्था को धराशायी कर दिया। शम्स से ही रूमी ने प्रेम का वास्तविक अर्थ सीखा। परिणाम ये हुआ कि वो खुलापन, वो मौज रूमी के जीवन में भी उतर आई और सामाजिक प्रतिष्ठा की परवाह किए बिना सड़कों पर नृत्य के रूप में अभिव्यक्त हुई। शम्स के विरह में उपजी वही वेदना आगे चलकर रूमी के अमर कलामों का आधार बनी। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eप्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत रूमी की प्रसिद्ध कविता “इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना” के मर्म को आज के संदर्भ में उद्घाटित करते हैं। यह पुस्तक एक ऐसी 'वेदांतिक चाबी' प्रस्तुत करती है जिससे रूमी के गूढ़ और रहस्यात्मक सूफी कलाम आज के पाठक के लिए पूरी स्पष्टता के साथ खुलने लगते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003eवे कहते हैं: “तुम पैदा ही आशिक होते हो! और आशिक का मतलब ही है बंधन का मुक्ति के प्रति खिंचाव।” प्रेम पिंजरे नहीं, पंख देता है, उड़ान देता है। भीतर का वह आशिक जीवंत हो उठता है जब उसे संतों का संग मिल जाता है। यह पुस्तक आप सबके लिए उसी संगति का आमंत्रण है, जो आपके जीवन में उस इश्क-ए-हकीकी का द्वार बन सकती है, जो रूमी के जीवन में उतरा। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि आपके जीवन के पिंजरे को ध्वस्त करने का एक विरल अवसर है। \u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"PrashantAdvait Foundation","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":42728860549216,"sku":"Ishq_Hai_Asman","price":199.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0602\/0176\/2912\/files\/1000x1400_96aac7af-1d7c-4b38-9ce0-bdec43cc776a.jpg?v=1777441611","url":"https:\/\/apbooks.acharyaprashant.org\/products\/ishq-hai-asman","provider":"Acharya Prashant Books","version":"1.0","type":"link"}