{"product_id":"jin_satguru","title":"जिन सतगुरु पहचाना नहीं (Jin Satguru Pehchana Nahin)","description":"\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eकबीर साहब का भजन “जिन सतगुरु पहचाना नहीं” मनुष्य की उस गहरी भटकन पर चोट करता है जिसमें वह शांति, मुक्ति और सत्य तो चाहता है, पर उन्हें पहचान नहीं पाता।\u003c\/span\u003e\u003cb\u003e\u003c\/b\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eप्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत इस प्रसिद्ध भजन की व्याख्या करते हैं जिसका केंद्रीय संदेश यही है: समस्या चाह की कमी नहीं, पहचान की कमी है। “जिन सतगुरु पहचाना नहीं” का गहरा आशय बाहरी गुरु की पहचान भर नहीं है। आचार्य प्रशांत पुस्तक में स्पष्ट करते हैं कि सतगुरु को पहचानने की पहली शर्त है अपनी बीमारी\/समस्या को पहचानना। जब तक मनुष्य भीतर पराश्रयता, भय, भ्रम और आदतों से संचालित होने की वृत्ति को नहीं देखता, तब तक वह सही गुरु, सही ज्ञान या सही मार्ग भी कैसे पहचान सकता है? अपनी समस्या का \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eईमानदार अवलोकन\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e ही उपचार का आरंभ है। सही गुरु की पहचान, स्वयं की सही पहचान से ही शुरू होती है।\u003c\/span\u003e\u003cb\u003e\u003c\/b\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"ltr\"\u003e\u003cspan\u003eयह पुस्तक आपको किसी बाहरी सहारे की ओर नहीं, \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eस्वयं को साफ़-साफ़ देखने\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e की ओर आमंत्रित करती है। \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003eऐसी स्पष्टता\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e जिसके बाद बेचैनी समस्या नहीं बचती, बल्कि मार्गदर्शन की शुरुआत बन जाती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e","brand":"PrashantAdvait Foundation","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":42785427161184,"sku":"Jin_Satguru","price":129.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0602\/0176\/2912\/files\/S.jpg?v=1780466815","url":"https:\/\/apbooks.acharyaprashant.org\/products\/jin_satguru","provider":"Acharya Prashant Books","version":"1.0","type":"link"}