{"product_id":"man-mast-hua","title":"मन मस्त हुआ (Mann Mast Hua)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan data-sheets-root=\"1\"\u003eकबीर साहब द्वारा रचा यह भजन उस मस्ती को प्रकट करने का प्रयास है, जिसकी तलाश में हम सभी रहते हैं। \u003cbr\u003eकभी वे इस मस्ती को हीरा कहते हैं, कभी हल्केपन से जोड़ते हैं, कभी हंस को मिले मानसरोवर की उपमा देते हैं, और कभी साहब के मिल जाने की बात करते हैं। \u003cbr\u003eभजन की हर पंक्ति का पहला भाग उपमाओं के माध्यम से उस मस्ती को प्रकट करता है, और दूसरा भाग एक सहज प्रश्न उठाता है—जब इतना ऊँचा कुछ मिल गया है, जब जीवन में स्पष्टता का प्रकाश आ गया है, तो अब क्या संदेह बचा? \u003cbr\u003eअब सवाल यही है: यह मस्ती जीवन में उतरेगी कैसे? \u003cbr\u003eइसका उत्तर भी कबीर साहब आख़िरी पंक्ति में दे जाते हैं—“साहेब मिल गए तिल ओले।” \u003cbr\u003eप्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत द्वारा इस भजन की एक-एक पंक्ति पर की गई स्पष्ट और सारगर्भित व्याख्या को संकलित किया गया है। \u003cbr\u003eभजन को गाने मात्र से जो आनंद आता है, यह पुस्तक आपको उस आनंद की जड़ तक ले जाने का आमंत्रण है। \u003cbr\u003eयदि आप इस मस्ती को सिर्फ़ छूना नहीं, जीना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है। \u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"PrashantAdvait Foundation","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":42716452913248,"sku":"Man_Mast_Hua","price":199.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0602\/0176\/2912\/files\/Shopify_441f33cb-ec56-41d4-b09a-c0a9dba25223.jpg?v=1776668394","url":"https:\/\/apbooks.acharyaprashant.org\/products\/man-mast-hua","provider":"Acharya Prashant Books","version":"1.0","type":"link"}