पी ले प्याला हो मतवाला | Pee Le Pyaala Ho Matwaala
Couldn't load pickup availability
कबीर साहब के सबसे लोकप्रिय भजनों में से एक, "पी ले प्याला हो मतवाला," हमें ऐसे प्याले की ओर आमंत्रित कर रहा है जो अमरत्व का द्वार है।
यह सुनते ही हमारे सामने तुरंत एक लुभावनी छवि आ जाती है — किसी देवता के दिए वरदान की, या उस पारस पत्थर की, जो बस मिथकों और कहानियों में ही मिलते हैं।
पर संतों का अमृत बिलकुल इसी जीवन में उपलब्ध हो सकता है। आचार्य प्रशांत इस सच्चाई को कुछ ऐसी मौलिक और जीवंत बोध-कथाओं के माध्यम से उजागर करते हैं, जो भजन के मर्म को हमारे ही जीवन के धरातल पर ले आती हैं।
बात शुरू होती है एक मतवाले घोड़े और ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबे एक टट्टू की गाथा से — टट्टू अपनी बँधी-बँधाई दिनचर्या में इतना संस्कारित है कि घोड़े की उन्मुक्तता उसे 'बेहोशी' प्रतीत होती है। पर क्या हो, अगर वह खुद से पूछ ले कि जिसे वह होश मानता है, वह आख़िर है क्या? कहीं घोड़े का मतवालापन ही तो उस अमरत्व की कुंजी नहीं?
भजन की एक-एक पंक्ति ऐसी ही रोचक कहानियों के माध्यम से खुलती जाती है, और पाठक को उस स्पष्टता तक ले जाती है जहाँ वह अपने संबंधों, कामनाओं और समस्याओं को दुनिया-प्रदत्त दृष्टि से नहीं, बल्कि एक ईमानदार दृष्टि से देख सके।
यह पुस्तक उनके लिए है जो व्यर्थ के झंझटों से मुक्त होकर जीवन की वास्तविक गहराई में उतरना चाहते हैं, वह गहराई जो संसार के त्याग से नहीं, बल्कि उससे सही संबंध बनाने से उपजती है।
Share:
कबीर साहब के सबसे लोकप्रिय भजनों में से एक, "पी ले प्याला हो मतवाला," हमें ऐसे प्याले की ओर आमंत्रित कर रहा है जो अमरत्व का द्वार है।
यह सुनते ही हमारे सामने तुरंत एक लुभावनी छवि आ जाती है — किसी देवता के दिए वरदान की, या उस पारस पत्थर की, जो बस मिथकों और कहानियों में ही मिलते हैं।
पर संतों का अमृत बिलकुल इसी जीवन में उपलब्ध हो सकता है। आचार्य प्रशांत इस सच्चाई को कुछ ऐसी मौलिक और जीवंत बोध-कथाओं के माध्यम से उजागर करते हैं, जो भजन के मर्म को हमारे ही जीवन के धरातल पर ले आती हैं।
बात शुरू होती है एक मतवाले घोड़े और ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबे एक टट्टू की गाथा से — टट्टू अपनी बँधी-बँधाई दिनचर्या में इतना संस्कारित है कि घोड़े की उन्मुक्तता उसे 'बेहोशी' प्रतीत होती है। पर क्या हो, अगर वह खुद से पूछ ले कि जिसे वह होश मानता है, वह आख़िर है क्या? कहीं घोड़े का मतवालापन ही तो उस अमरत्व की कुंजी नहीं?
भजन की एक-एक पंक्ति ऐसी ही रोचक कहानियों के माध्यम से खुलती जाती है, और पाठक को उस स्पष्टता तक ले जाती है जहाँ वह अपने संबंधों, कामनाओं और समस्याओं को दुनिया-प्रदत्त दृष्टि से नहीं, बल्कि एक ईमानदार दृष्टि से देख सके।
यह पुस्तक उनके लिए है जो व्यर्थ के झंझटों से मुक्त होकर जीवन की वास्तविक गहराई में उतरना चाहते हैं, वह गहराई जो संसार के त्याग से नहीं, बल्कि उससे सही संबंध बनाने से उपजती है।

You Also Viewed
पी ले प्याला हो मतवाला | Pee Le Pyaal...