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रैन दिवस पिया संग रहत है | Rain Diwas Piya Sang Rahat Hai

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व्यक्ति जन्म लेता है, कुछ दिन जीता है, और उसकी मृत्यु हो जाती है। संत, ऋषि, जिन्होंने जीवन को जाना है, उन्होंने यही सवाल बार-बार पूछा है: जैसे जी रहे हो, क्या वैसे जीने के लिए जन्मे हो? जैसी आपकी ज़िंदगी है, आपको कुछ साल पहले दिखाई गई होती, तो भी क्या आप ऐसी ही ज़िंदगी चाहते?

कबीर साहब के शब्दों को महज़ भावुक भजनों के दायरे से बाहर निकालकर आचार्य प्रशांत इस पुस्तक में सीधे हमारे जीवन की सबसे गहरी मनोवैज्ञानिक परतों के बीच ले आते हैं। वे बताते हैं कि मनुष्य रोटी, कपड़ा, मकान और सेहत जैसी बुनियादी सुरक्षा पा लेने के बाद भी एक अनजाने डर में जीता है। इसी डर के कारण वह बंधनों, मान्यताओं और सीमाओं को स्वीकार करता जाता है, और जीवन द्वारा दिए उड़ान के अवसर गँवाता जाता है।

बोध या ज्ञान का क्षेत्र एक सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने या मृत्यु पश्चात किसी पारलौकिक जगत का आश्वासन देने के लिए नहीं है। बोध इसलिए है ताकि आप अपनी साधारण अनुभवों की व्यर्थता को साफ़ देख सकें और उसे लाँघने का साहस जुटा सकें। आपकी ज़िंदगी की ऊँची उड़ान, आपकी उच्चतम संभावना ही बोध का लक्ष्य है। “पिया”आपकी ज़िंदगी की यही उच्चतम संभावना है।

जीवन अपनी समग्र संभावना के साथ हर पल एक नया चुनाव, ऊँची उड़ान का एक नया न्योता लेकर आता है। प्रस्तुत पुस्तक आपको अपने बंधनों, मान्यताओं, सुरक्षित ढर्रों के प्रति स्पष्टता देती है, जिसके बाद जीवन के हर अज्ञात विकल्प, हर न्योते को स्वीकार करने का साहस भीतर से जगने लगता है।

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व्यक्ति जन्म लेता है, कुछ दिन जीता है, और उसकी मृत्यु हो जाती है। संत, ऋषि, जिन्होंने जीवन को जाना है, उन्होंने यही सवाल बार-बार पूछा है: जैसे जी रहे हो, क्या वैसे जीने के लिए जन्मे हो? जैसी आपकी ज़िंदगी है, आपको कुछ साल पहले दिखाई गई होती, तो भी क्या आप ऐसी ही ज़िंदगी चाहते?

कबीर साहब के शब्दों को महज़ भावुक भजनों के दायरे से बाहर निकालकर आचार्य प्रशांत इस पुस्तक में सीधे हमारे जीवन की सबसे गहरी मनोवैज्ञानिक परतों के बीच ले आते हैं। वे बताते हैं कि मनुष्य रोटी, कपड़ा, मकान और सेहत जैसी बुनियादी सुरक्षा पा लेने के बाद भी एक अनजाने डर में जीता है। इसी डर के कारण वह बंधनों, मान्यताओं और सीमाओं को स्वीकार करता जाता है, और जीवन द्वारा दिए उड़ान के अवसर गँवाता जाता है।

बोध या ज्ञान का क्षेत्र एक सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने या मृत्यु पश्चात किसी पारलौकिक जगत का आश्वासन देने के लिए नहीं है। बोध इसलिए है ताकि आप अपनी साधारण अनुभवों की व्यर्थता को साफ़ देख सकें और उसे लाँघने का साहस जुटा सकें। आपकी ज़िंदगी की ऊँची उड़ान, आपकी उच्चतम संभावना ही बोध का लक्ष्य है। “पिया”आपकी ज़िंदगी की यही उच्चतम संभावना है।

जीवन अपनी समग्र संभावना के साथ हर पल एक नया चुनाव, ऊँची उड़ान का एक नया न्योता लेकर आता है। प्रस्तुत पुस्तक आपको अपने बंधनों, मान्यताओं, सुरक्षित ढर्रों के प्रति स्पष्टता देती है, जिसके बाद जीवन के हर अज्ञात विकल्प, हर न्योते को स्वीकार करने का साहस भीतर से जगने लगता है।

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